GAYA JI, BIHAR | 1 मई 2026 को बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गया जी और बोधगया मठ में पहुंचे। यह गया और बोधगया में उनकी मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी। लेकिन जो दृश्य शहर में दिखा वह किसी स्वागत से कम और आम जनता की परेशानी से ज्यादा था।
12 बजे से बंद हो गईं सड़कें, सीएम आए 3 बजे
सम्राट चौधरी गयाजी में दोपहर करीब 3 बजे पहुंचे। लेकिन प्रोटोकॉल के नाम पर गया शहर की सड़कें दोपहर 12 बजे से ही ब्लॉक कर दी गई थीं। यानी सीएम के आने से पूरे तीन घंटे पहले से आधे से ज्यादा शहर को जाम कर दिया गया। गया से बोधगया जाने वाला मुख्य मार्ग – गया बाईपास से बोधगया तक लगभग 12 किलोमीटर की पूरी मेन रोड – पूरी तरह से बंद रही। जितनी भी लिंक रोड थीं, वे भी एक-एक करके बंद कर दी गईं।
नतीजा यह रहा कि सैकड़ों लोग घंटों गलत जगहों पर फंसे रहे। अपने घर नहीं पहुंच सके, दुकानदार अपनी दुकान नहीं खोल सके, मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच सके।

प्रोटोकॉल के नाम पर धमकी
जो लोग सड़क बंद होने का कारण पूछने लगे या रास्ता मांगने लगे, उन्हें पुलिस की ओर से बेवजह चालान काटने की धमकी दी गई। छोटी-मोटी बातचीत को भी विवाद में तब्दील करने की कोशिश हुई। यह रवैया बताता है कि प्रोटोकॉल सिर्फ सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि असुविधा दिखाने का एक जरिया भी बन गया है।
सुबह से बंद रहीं दुकानें
गयाजी शहर में सुबह से ही अधिकांश दुकानें बंद करवा दी गई थीं। एक सीएम की जनसभा के लिए पूरे शहर के व्यापारियों को एक दिन का नुकसान उठाना पड़ा। बुद्ध पूर्णिमा जैसे त्योहार के दिन गया और बोधगया में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की अच्छी भीड़ रहती है। उस दिन दुकानें बंद रहने से कारोबार पर जो असर पड़ा, उसका हिसाब शायद कोई नहीं लगाएगा।
लोगों का सवाल – बदलाव कब?
गया और बोधगया के लोगों का कहना है कि सीएम बदलने से कुछ नहीं होता, धरातल पर बदलाव दिखना चाहिए। हर बार यही होता है – प्रोटोकॉल का बहाना, सड़कें बंद, आम आदमी परेशान।
लोगों के मन में एक सवाल है जो शायद कोई नेता सुनना नहीं चाहता – आखिर सड़क क्यों जाम की जाती है? क्या जनता से सीएम को खतरा होता है? या सीएम को सड़क पर जनता देखना पसंद नहीं? जो नेता जनता का प्रतिनिधि होने का दावा करता है, वही जनता को घंटों सड़क पर रोककर खुद निकल जाता है – यह लोकतंत्र का कौन सा रूप है?
CM के काफिले में इतने कार क्यों होते है? कर में ड्राइवर के अलावे कोई और बैठा हुआ दिखाई नहीं देता पुरी गाड़िया खाली होती है तो क्या ये दिखावे के लिए? लेकिन देखा कौन है सड़कों पर तो किसी को आने ही नहीं दिया जाता। जब तक इस तरह की प्रोटोकॉल वाली परंपरा नहीं बदलेगी तब तक बिहार का विकास संभव है।
यहां कुछ Video विज़ुअल देख सकते हैं!
नए सीएम, पुरानी परंपरा
सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री हैं। गया और बोधगया में यह उनकी पहली बड़ी सार्वजनिक उपस्थिति थी। पहली छाप हमेशा याद रहती है। और गया की जनता ने इस पहली मुलाकात में जो देखा वह था बंद सड़कें, रुकी हुई जिंदगी और चालान की धमकी।
अगर यही प्रशासनिक संस्कृति आगे भी चलती रही, तो धरातल पर बदलाव की उम्मीद करना बेमानी होगा।
रिपोर्ट: Subhash Kumar (Editor in Chief)