‘इंडिया या भारत…’ शब्द पर बहस तेज, इस राज्य में नहीं पढ़ाई जाएंगी NCERT की नई किताबें

timelyindia.com
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‘इंडिया’ और ‘भारत’ को लेकर बार फिर नई बहस शुरू हो गई है. नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) पैनल ने सभी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों में ‘इंडिया’ का नाम बदलकर ‘भारत’ करने का प्रस्ताव दिया है. जल्द ही NCERT की क‍िताबों में एक नया ऐतिहासिक बदलाव हो सकता है. इस बदलाव के बाद अब छात्रों को किताबों में इंडिया की जगह भारत शब्द पढ़ाया जा सकता है. इस बीच केरल सरकार ने एनसीईआरटी के इस प्रस्ताव से पीछा छुड़ाने का रास्ता तलाश रही है.

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‘इंडिया’ शब्द नहीं हटाएगी केरल सरकार!

केरल सरकार एनसीईआरटी की उन किताबों को न पढ़ाने की संभावनाएं तलाश रही है, जिसमें ‘इंडिया’ नाम बदल जाएगा और ‘भारत’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा. राज्य शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी एनसीईआरटी पैनल के सुझाव पर अपना रुख साफ किया है कि राज्य भारत नाम के साथ ही एससीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को स्वयं जारी करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है.

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यह पहली बार नहीं है जब केरल ने एनसीईआरटी से हटकर खुद से सिलेबस में बदलाव किया है. इससे पहले केरल ने अपने पाठ्यक्रम से एनसीईआरटी द्वारा हटाए गए हिस्सों को पढ़ाने के लिए पूरक पाठ्यपुस्तकें जारी की थीं. हालांकि केरल का एससीईआरटी एनसीईआरटी पाठ्यक्रम का पालन करता है.

AAP पार्टी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना 

NCERT पर AAP ने कहा कि पीएम मोदी इंडिया अलायंस से इतने डरे हुए हैं कि वह इंडिया को भारत से रिप्लेस कर रहे हैं. आप की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि संविधान में इंडिया और भारत दोनों का उल्लेख है. पीएम मोदी इंडिया अलायंस के डर से अन प्रोडक्ट‍ि वर्क में लगे हुए हैं.

क्या है मामला?

दरअसल, हाल ही में एनसीईआरटी पैनल ने सभी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों में इंडिया का नाम बदलकर भारत करने का प्रस्ताव दिया है. पैनल के सदस्यों में से एक सीआई आइजैक ने कहा कि प्रस्ताव मंजूर होने के बाद एनसीईआरटी किताबों के अगले सेट में इंडिया का नाम बदलकर भारत कर दिया जाएगा. समिति ने पाठ्यपुस्तकों में “हिंदू विक्ट्रीज” को उजागर करने की भी सिफारिश की है.

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कहां से आया ‘इंडिया’ शब्द?

आइजैक ने कहा कि असल में इंडिया शब्द का आमतौर पर इस्तेमाल ईस्ट इंडिया कंपनी और 1757 के प्लासी के युद्ध के बाद होना शुरू हुआ था. वहीं भारत शब्द का जिक्र विष्णु पुराण जैसे प्राचीन लेखों में मिलता है, जो 7 हजार साल पुराने हैं. ऐसे में समिति ने आम सहमति से सिफारिश की है कि सभी कक्षाओं की किताबों में भारत के नाम का इस्तेमाल होना चाहिए.

समिति ने पाठ्यपुस्तकों में ‘एंशि‍एंट हिस्ट्री’ के स्थान पर ‘क्लासिकल हिस्ट्री’ को शामिल करने की सिफारिश की. इतिहास को अब प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक में विभाजित नहीं किया जाएगा, क्योंकि इससे पता चलता है कि भारत एक पुराना और ब्रिटिश साम्राज्यवाद से अनजान राष्ट्र है. अंग्रेजों ने भारतीय इतिहास को प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक में बांटा है. अब एंशिएंट का मतलब प्राचीन होता है. वो दिखाता है कि देश अंधेरे में था, जैसे कि उसमें कोई वैज्ञानिक जागरूकता थी ही नहीं. सौर मंडल पर आर्यभट्ट के काम समेत ऐसे कई उदाहरण भी हैं.

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