केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को पीएम श्री योजना के पहले चरण में 124 स्कूलों का उद्घाटन किया. रोहतक में हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (PM-SHRI scheme) कार्यक्रम के तहत स्कूल 21वीं सदी की आधुनिक शिक्षा के साथ उत्कृष्टता का प्रतीक होंगे.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बताया कि पीएम श्री योजना के तहत स्कूलों के शुभारंभ से हरियाणा में स्कूली शिक्षा की क्षमता बढ़ेगी और राज्य के बच्चों को इस पहल से लाभ होगा. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति ने अपने पाठ्यक्रम के हर पहलू में छात्रों के विकास को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. नई शिक्षा नीति में स्किल और टेक्नोलॉजी बेस्ड एजुकेशन को बढ़ावा देने और मातृभाषा पर जोर दिया जाएगा.
दूसरे चरण में शुरू होंगे 128 पीएम श्री स्कूल
सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास में, पीएम एसएचआरआई योजना के तहत पहले चरण में 124 स्कूलों का उद्घाटन किया गया है, दूसरे चरण में अतिरिक्त 128 स्कूल शुरू किए जाएंगे. हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने कहा कि पहले चरण में योजना के तहत 124 स्कूलों की स्थापना के लिए केंद्र सरकार द्वारा 85 करोड़ रुपये का आवंटन प्रदान किया गया है.
4000 प्लेवे स्कूलों को मिलेगी ‘बाल वाटिका’ की मान्यता
इसके अलावा देशभर में 14,500 से अधिक स्कूलों को विकसित करना है. खट्टर ने घोषणा की कि राज्य में स्थापित 4000 प्लेवे स्कूलों को अब ‘बाल वाटिका’ स्कूलों के रूप में मान्यता दी जाएगी. सरकार की भविष्य में भी इतनी ही संख्या में अतिरिक्त स्कूल स्थापित करने की योजना है. उन्होंने कहा कि बच्चों को खेलकूद सहित शिक्षा प्रदान करने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों को स्कूलों में बदल दिया गया है.
पीएम श्री योजना क्या है?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत देशभर के 14500 स्कूलों को पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना के तहत अपग्रेड किया जाएगा. केंद्र की इस योजना से 18 लाख छात्रों को फायदा होगा. खास बात यह है कि ये सभी स्कूल सरकारी होंगे, जिनका चयन राज्यों के साथ मिलकर किया जाएगा. पीएम मोदी ने शिक्षक दिवस के मौके पर इसकी घोषणा की थी.
पीएम श्री स्कूलों की मुख्य विशेषताएं
पीएम श्री स्कूलों को ग्रीन स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें सौर पैनल और एलईडी लाइट, प्राकृतिक खेती के साथ पोषण उद्यान, अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त, जल संरक्षण और संचयन, पर्यावरण की सुरक्षा से संबंधित परंपराओं / प्रथाओं का अध्ययन जैसे पर्यावरण के अनुकूल पहलुओं को शामिल किया जाएगा.
इन स्कूलों में अपनाई गई शिक्षाशास्त्र अधिक अनुभवात्मक, समग्र, एकीकृत, खेल/खिलौना-आधारित (विशेषकर, मूलभूत वर्षों में) पूछताछ-संचालित, खोज-उन्मुख, चर्चा-आधारित, लचीला और मनोरंजक होगा.
प्रत्येक क्लास में प्रत्येक बच्चे के सीखने के परिणामों पर ध्यान दिया जाएगा. सभी स्तरों पर मूल्यांकन वैचारिक समझ और वास्तविक जीवन स्थितियों में ज्ञान के अनुप्रयोग पर आधारित होगा और योग्यता आधारित होगा.
प्रत्येक डोमेन के लिए उपलब्ध संसाधनों और उपलब्धता, पर्याप्तता, उपयुक्तता और उपयोग के संदर्भ में उनकी प्रभावशीलता और उनके प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों का आकलन किया जाएगा और अंतराल को व्यवस्थित और नियोजित तरीके से भरा जाएगा.
रोजगार बढ़ाने और बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए क्षेत्र कौशल परिषदों और स्थानीय उद्योग के साथ जुड़ाव का पता लगाया जाएगा.